दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में एक बुजुर्ग डॉक्टर की हत्या के मामले को सुलझाने का पुलिस ने दावा किया है. पुलिस ने बताया कि लूट के बाद 65 साल के बुजुर्ग डॉक्टर मुकीम की हत्या की गई थी. इस मामले में कंपाउंडर समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
पुलिस ने सोमवार को बताया कि कंपाउंडर ने कुछ लड़कों की मदद से डॉक्टर के घर की मुखबिरी की थी. असल में डॉक्टर की बेटी की शादी थी और इसके लिए घर में लाखों रुपये और गहने रखे हुए थे. पुलिस के मुताबिक कंपाउंडर की मुखबिरी के बाद लूट और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया. इस मामले में लूट की रकम रखने वाले आरोपियों के मां बाप को भी गिरफ्तार किया गया है.
गौरतलब है कि 65 साल के बुजुर्ग डॉक्टर मुकीम की लाश उनके ही घर में पड़ी मिली और कमरे के अंदर सारा सामान बिखरा हुआ था. बुजुर्ग डॉक्टर मुकीम जहांगीरपुरी के एच ब्लॉक के मकान में अपनी बेटी के साथ रहते थे.
उस दिन बेटी सुबह 7:00 बजे अपने स्कूल पढ़ाने के लिए चली गई और डॉक्टर मुकीम घर पर अकेले थे. करीब 10 बजे जब घर में काम करने वाली नौकरानी पहुंची तो देखा कि सामान अस्त-व्यस्त है और पास में ही डॉक्टर मुकीम की लाश पड़ी थी. लाश के पास एक बड़ा सा चाकू भी पड़ा था, लेकिन हत्या चाकू से नहीं की गई थी.
कुछ ही दिन पहले हुई थी बेटी की सगाई
पुलिस को शक था कि डॉक्टर मुकीम की हत्या गला दबाकर की गई है. 2 दिन पहले ही डॉक्टर मुकीम की बेटी की सगाई हुई थी और 9 दिसंबर को उसकी शादी होनी थी. पुलिस को शक था कि शादी की वजह से घर में कुछ कैश और जेवरात रहे होंगे, जिसकी जानकारी कातिल को रही होगी और उसी को लूटने के मकसद से कातिल घर में आया होगा. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. पुलिस को शक है कि घर में फ्रेंडली एंट्री हुई है.
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज 101वीं जयंती है. फौलादी इरादों और निडर फैसलों वाली देश की पहली महिला प्रधानमंत्री का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था. इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली और उसके बाद 1980 में दोबारा इस पद पर पहुंचीं और 31 अक्टूबर 1984 को पद पर रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई.
उनका जन्म इलाहाबाद में हुआ था, उनका बचपन का नाम प्रियदर्शिनी था. वह प्रभावी व्यक्तित्व वाली मृदुभाषी महिला थीं और अपने कड़े से कड़े फैसलों को पूरी निर्भयता से लागू करने का हुनर जानती थीं. उन्होंने जून, 1984 में अमृतसर में सिखों के पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था.
पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की जयंती आज: मोदी, सोनिया और राहुल ने दी श्रद्धांजलि
इसके अलावा 1975 में आपातकाल की घोषणा और उसके बाद के घटनाक्रम को भी उनके एक कठोर फैसले के तौर पर देखा जाता है. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था. आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे. इसे आजाद भारत का सबसे विवादास्पद दौर भी माना जाता है. वहीं अगले सुबह यानी 26 जून को समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में आपातकाल की घोषणा के बारे में सुना था.
पुलिस ने सोमवार को बताया कि कंपाउंडर ने कुछ लड़कों की मदद से डॉक्टर के घर की मुखबिरी की थी. असल में डॉक्टर की बेटी की शादी थी और इसके लिए घर में लाखों रुपये और गहने रखे हुए थे. पुलिस के मुताबिक कंपाउंडर की मुखबिरी के बाद लूट और हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया. इस मामले में लूट की रकम रखने वाले आरोपियों के मां बाप को भी गिरफ्तार किया गया है.
गौरतलब है कि 65 साल के बुजुर्ग डॉक्टर मुकीम की लाश उनके ही घर में पड़ी मिली और कमरे के अंदर सारा सामान बिखरा हुआ था. बुजुर्ग डॉक्टर मुकीम जहांगीरपुरी के एच ब्लॉक के मकान में अपनी बेटी के साथ रहते थे.
उस दिन बेटी सुबह 7:00 बजे अपने स्कूल पढ़ाने के लिए चली गई और डॉक्टर मुकीम घर पर अकेले थे. करीब 10 बजे जब घर में काम करने वाली नौकरानी पहुंची तो देखा कि सामान अस्त-व्यस्त है और पास में ही डॉक्टर मुकीम की लाश पड़ी थी. लाश के पास एक बड़ा सा चाकू भी पड़ा था, लेकिन हत्या चाकू से नहीं की गई थी.
कुछ ही दिन पहले हुई थी बेटी की सगाई
पुलिस को शक था कि डॉक्टर मुकीम की हत्या गला दबाकर की गई है. 2 दिन पहले ही डॉक्टर मुकीम की बेटी की सगाई हुई थी और 9 दिसंबर को उसकी शादी होनी थी. पुलिस को शक था कि शादी की वजह से घर में कुछ कैश और जेवरात रहे होंगे, जिसकी जानकारी कातिल को रही होगी और उसी को लूटने के मकसद से कातिल घर में आया होगा. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. पुलिस को शक है कि घर में फ्रेंडली एंट्री हुई है.
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज 101वीं जयंती है. फौलादी इरादों और निडर फैसलों वाली देश की पहली महिला प्रधानमंत्री का जन्म 19 नवंबर 1917 को हुआ था. इंदिरा गांधी ने 1966 से 1977 के बीच लगातार तीन बार देश की बागडोर संभाली और उसके बाद 1980 में दोबारा इस पद पर पहुंचीं और 31 अक्टूबर 1984 को पद पर रहते हुए ही उनकी हत्या कर दी गई.
उनका जन्म इलाहाबाद में हुआ था, उनका बचपन का नाम प्रियदर्शिनी था. वह प्रभावी व्यक्तित्व वाली मृदुभाषी महिला थीं और अपने कड़े से कड़े फैसलों को पूरी निर्भयता से लागू करने का हुनर जानती थीं. उन्होंने जून, 1984 में अमृतसर में सिखों के पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया था.
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इसके अलावा 1975 में आपातकाल की घोषणा और उसके बाद के घटनाक्रम को भी उनके एक कठोर फैसले के तौर पर देखा जाता है. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादस्पद काल था. आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए थे. इसे आजाद भारत का सबसे विवादास्पद दौर भी माना जाता है. वहीं अगले सुबह यानी 26 जून को समूचे देश ने रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज में आपातकाल की घोषणा के बारे में सुना था.
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